
नेशनल हाईवे या मौत का जाल? पहली बारिश में ही उखड़ी करोड़ों की सड़क!
विकास' की पोल: बारिश की पहली फुहार ने खोल दी करोड़ों की सड़क की कलई 5. सड़क है या गड्ढों का मेला? जिम्मेदार विभाग गहरी नींद में, आम जनता जोखिम में 6. टोल तो वसूला जा रहा है, पर सड़क कहां है? नेशनल हाईवे की बदहाली पर उठे सवाल
अजीत मिश्रा (खोजी)
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा नेशनल हाईवे: पहली बारिश में ही उखड़ी करोड़ों की सड़क, मौत बनकर खड़े हैं बड़े-बड़े गड्ढे
- भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा हरैया का नेशनल हाईवे, साल भर में ही सड़क में बने गहरे गड्ढे
- क्या हादसों का इंतज़ार है? करोड़ों खर्च करने के बाद भी ‘गड्ढा मुक्त’ का दावा फुस्स
हरैया (बस्ती): विकास के नाम पर सरकारी धन की किस कदर बंदरबांट की जाती है, इसकी बानगी हरैया में नेशनल हाईवे की बदहाल स्थिति से साफ झलक रही है। अभी हाल ही में करोड़ों रुपये खर्च कर जिस सड़क को ‘गड्ढा मुक्त’ करने का ढिंढोरा पीटा गया था, वह पहली ही हल्की बारिश की मार नहीं झेल सकी। सड़क की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं और अब यह सड़क राहगीरों के लिए मौत का जाल बन गई है।
एक वर्ष भी नहीं चला ‘विकास’ का दावा
हैरानी और शर्म की बात यह है कि जिस सड़क की मरम्मत हुए अभी एक वर्ष का समय भी पूरा नहीं हुआ है, वह आज पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। चौकड़ी टोल प्लाजा के पास समेत हाईवे के कई प्रमुख स्थानों पर सड़क धंस गई है, जिससे वहां बड़े-बड़े जानलेवा गड्ढे बन गए हैं। निर्माण कार्य की गुणवत्ता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पहली बारिश में ही सड़क ने अपना दम तोड़ दिया।
क्या हादसों का इंतजार कर रहा प्रशासन?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह लापरवाही का चरम है। आए दिन दोपहिया वाहन चालक इन गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं। बड़े वाहनों के लिए भी ये गड्ढे किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर करोड़ों की लागत वाली यह सड़क इतनी जल्दी कैसे उखड़ गई? क्या निर्माण कार्य के दौरान मानक का पालन केवल कागजों तक सीमित था?
उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग
सड़क की दुर्दशा से आक्रोशित स्थानीय निवासियों ने अब विभागीय अधिकारियों और निर्माण एजेंसी की मिलीभगत की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन गड्ढों को नहीं भरा गया और निर्माण की गुणवत्ता की जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो सड़क पर कभी भी कोई भीषण हादसा हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।
प्रश्न अब यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी के होने का इंतजार कर रहा है, या फिर तब जागेगा जब कोई अपनी जान गंवा बैठेगा? जनता अब केवल मरम्मत नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार करने वाले जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई चाहती है।





















